फसलों में संतुलित उर्वरकों का उपयोग विषय पर कृषि विज्ञान केन्द्र, सतना द्वारा चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
कृषि विज्ञान केन्द्र, सतना द्वारा किसानों को संतुलित उर्वरकों के महत्व के प्रति जागरूक करने हेतु व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है । यह अभियान किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने, मिट्टी की उर्वराशक्ति बनाए रखने तथा फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है । अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्रामों में प्रशिक्षण, प्रदर्शन, किसान गोष्ठी, रैली एवं प्रचार-प्रसार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ।
अभियान का उद्देश्य
इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना है कि केवल यूरिया आधारित खेती दीर्घकाल में मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। फसल की आवश्यकतानुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग ही बेहतर उत्पादन एवं मिट्टी स्वास्थ्य का आधार है।
अभियान के प्रमुख उद्देश्य निम्न हैं—
- मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना।
- किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन की जानकारी देना।
- रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद एवं जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
- लागत कम कर अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु वैज्ञानिक सलाह देना।
- पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना।
अभियान के अंतर्गत आयोजित गतिविधियाँ
- ग्राम स्तरीय किसान गोष्ठियाँ
कृषि विज्ञान केन्द्र, सतना के विषय वस्तु विशेषज्ञों एवं कार्यकर्म सहायको द्वारा विभिन्न ग्रामों में किसान गोष्ठियों एवं जनजागरूकता का आयोजन किया जा रहा है । इन गोष्ठियों में किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका एवं उर्वरक देने की सही विधि की जानकारी दी जाती है।
- मिट्टी परीक्षण एवं मृदा स्वास्थ्य जागरूकता
अभियान के दौरान किसानों को मिट्टी नमूना लेने की सही विधि सिखाई जा रही है तथा मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरक उपयोग की सलाह दी जा रही है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व से भी अवगत कराया जा रहा है।
- फसल प्रदर्शन एवं तकनीकी प्रदर्शन
विभिन्न फसलों में संतुलित उर्वरकों के उपयोग से प्राप्त परिणामों को प्रदर्शित करने हेतु प्रदर्शन प्लॉट लगाए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसान प्रत्यक्ष रूप से संतुलित पोषण प्रबंधन के लाभ देख पा रहे हैं।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम
कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा किसानों, ग्रामीण युवाओं एवं महिला कृषकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण में निम्न विषयों पर विशेष बल दिया जा रहा है—
- उर्वरकों की सही मात्रा एवं समय
- नैनो यूरिया का उपयोग
- जैविक खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट
- सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्व
- ड्रिप एवं फर्टिगेशन तकनीक
- प्रचार-प्रसार सामग्री का वितरण
अभियान के दौरान पम्पलेट, पोस्टर, बैनर एवं सूचना सामग्री वितरित की जा रही है। किसानों को सरल भाषा में वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
- खेत दिवस एवं जागरूकता रैली
किसानों के बीच जनजागरूकता बढ़ाने हेतु खेत दिवस, रैली एवं जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में किसानों को असंतुलित उर्वरक उपयोग से होने वाली हानियों के बारे में बताया जा रहा है।
किसानों को दी जा रही प्रमुख सलाह
- मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।
- केवल यूरिया पर निर्भर न रहें।
- एन.पी.के. का संतुलित अनुपात अपनाएं।
- जैविक खाद एवं हरी खाद का उपयोग बढ़ाएं।
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर आवश्यक तत्वों का प्रयोग करें।
- उर्वरकों का विभाजित मात्रा में उपयोग करें।
अभियान से प्राप्त लाभ
इस अभियान के माध्यम से किसानों में संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। किसान वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरक उपयोग अपनाने लगे हैं, जिससे—
- फसल उत्पादन में वृद्धि हो रही है।
- उर्वरक लागत कम हो रही है।
- मिट्टी की उर्वराशक्ति में सुधार हो रहा है।
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।
- गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
निष्कर्ष
कृषि विज्ञान केन्द्र, सतना द्वारा संचालित “फसलों में संतुलित उर्वरकों का उपयोग” जागरूकता अभियान किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ खेती की दिशा में प्रेरित कर रहा है। यह अभियान न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, बल्कि मिट्टी स्वास्थ्य संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



